Writer / Litterateur : राजस्थान समग्र सेवा संस्था के शारदा पुस्तकालय सभागार में वरिष्ठ साहित्यकार दयाराम वर्मा के काव्य-संग्रह ‘चिंग तम अमत्तनि’ का गरिमामय समारोह में लोकार्पण किया गया। कार्यक्रम में वरिष्ठ साहित्यकार नंद भारद्वाज, प्रेमकृष्ण शर्मा, फ़ारुख़ अफ़रीदी, प्रेमचंद गाँधी, दयाराम वर्मा, उमा, कमल मेहता और साकार श्रीवास्तव ने संयुक्त रूप से पुस्तक का विमोचन किया। इस अवसर पर साहित्यकारों ने संग्रह की कविताओं में व्यक्त सामाजिक सरोकारों, प्रकृति प्रेम और अन्याय के विरुद्ध प्रतिरोध की भावना पर अपने विचार रखे।
मणिपुर की एकता का प्रतीक है ‘चिंग तम अमत्तनि’
राही सहयोग संस्थान, जयपुर की अध्यक्ष एवं कार्यक्रम संयोजक कविता मुखर ने बताया कि पुस्तक का शीर्षक मणिपुरी नारे ‘चिंग तम अमत्तनि’ से लिया गया है। इसका अर्थ है कि मणिपुर घाटियों और पहाड़ियों से मिलकर बना है तथा इसके दोनों भू-भाग कभी अलग नहीं हुए। यह नारा मणिपुर की भौगोलिक और सामाजिक एकता का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि काव्य-संग्रह में मानवीय संवेदनाओं, सामाजिक परिस्थितियों और वर्तमान समय की चुनौतियों को कविताओं के माध्यम से अभिव्यक्त किया गया है। कार्यक्रम के दौरान संग्रह की कुछ चुनिंदा कविताओं का वाचन भी किया गया।
अन्याय और विद्रूपताओं के खिलाफ प्रतिरोध का स्वर हैं कविताएं: नंद भारद्वाज
वरिष्ठ साहित्यकार नंद भारद्वाज ने काव्य-संग्रह पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि दयाराम वर्मा ने प्रकृति, मणिपुर और देश की वर्तमान परिस्थितियों के संदर्भ में एक जागरूक नागरिक की पीड़ा को कवि के रूप में प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया है। उन्होंने कहा कि ये कविताएं अपने समय की विद्रूपताओं और अन्याय के खिलाफ निर्भीक प्रतिरोध का स्वर बनकर उभरी हैं। इनमें समाज की वास्तविकताओं के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण दिखाई देता है।
साहसी और जागरूक कवि की रचनाएं हैं संग्रह में शामिल
समीक्षा-सत्र के दौरान पत्रकार एवं कवयित्री उमा ने कहा कि संग्रह की प्रत्येक कविता अपने आप में अनूठी है और वर्तमान समय की जरूरतों को सामने रखती है। प्रोफेसर कमल मेहता ने कहा कि प्रकृति के विभिन्न तत्वों के बीच भी दर्द और संवेदनाओं का रिश्ता होता है। दयाराम वर्मा की कविताएं इसी भावनात्मक संबंध को अभिव्यक्त करती हैं। वरिष्ठ साहित्यकार प्रेमचंद गाँधी ने संग्रह की रचनाओं को साहसी कवि की कविताएं बताया। वहीं, व्यंग्यकार फ़ारुख़ अफ़रीदी ने दयाराम वर्मा को सशक्त और जागरूक कवि बताते हुए कहा कि उनकी कविताओं पर व्यापक साहित्यिक चर्चा किए जाने की आवश्यकता है।
विचार और प्रतिरोध के बिना कविता अधूरी: हरिराम मीणा
पूर्व प्रशासक एवं साहित्यकार हरिराम मीणा ने पुस्तक के शीर्षक को एकता का संदेश देने वाला नारा बताया। उन्होंने कहा कि विचार के बिना कविता का अस्तित्व नहीं होता। जब लंबे समय से दबी हुई भावनाएं ज्वालामुखी की तरह प्रकट होती हैं, तो वे प्रतिरोध के स्वर में सामने आती हैं। उन्होंने काव्य-संग्रह में व्यक्त विचारों और सामाजिक चेतना को महत्वपूर्ण बताया।
देशभर से मिलीं पाठकीय प्रतिक्रियाएं, कार्यक्रम में हुआ वाचन
कार्यक्रम का संचालन करते हुए राही सहयोग संस्थान की अध्यक्ष कविता मुखर ने बताया कि काव्य-संग्रह को लेकर देश के विभिन्न हिस्सों से पाठकों की प्रतिक्रियाएं प्राप्त हुई हैं। इन प्रतिक्रियाओं का वाचन व्यंग्यकार एवं लेखक साकार श्रीवास्तव और कथाकार नरेंद्र लाटा ने किया। कविता मुखर ने यह भी बताया कि विदेश में मौजूद संस्था के निदेशक प्रबोध गोविल ने कार्यक्रम की सफलता के लिए शुभकामनाएं भेजी हैं।
जयपुर के साहित्यकारों और पत्रकारों की रही विशेष उपस्थिति
लोकार्पण समारोह में जयपुर के साहित्यिक और पत्रकारिता जगत से जुड़े अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे। इनमें वरिष्ठ पत्रकार एवं साहित्यकार विनोद भारद्वाज, राजेंद्र बोड़ा, अशोक मुखर्जी, मणिमाला शर्मा, ज्योत्सना सक्सेना, डॉ. सुषमा शर्मा, शिवराज पाल सिंह, ओमेन्द्र और अरुण ठाकर सहित कई साहित्यप्रेमी, शोधार्थी और विद्यार्थी शामिल रहे। कार्यक्रम में वक्ताओं ने दयाराम वर्मा के काव्य-संग्रह को सामाजिक चेतना, मानवीय संवेदना और एकता के संदेश से जुड़ी महत्वपूर्ण साहित्यिक अभिव्यक्ति बताया। समारोह में साहित्य के माध्यम से समाज की चुनौतियों, प्रकृति के साथ मानवीय रिश्तों और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने की आवश्यकता पर भी चर्चा हुई।
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