SIR : सुप्रीम कोर्ट ने बिहार समेत पांच राज्यों में हुए चुनाव के दौरान की गई विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया को वैध और संवैधानिक करार दिया है। बुधवार को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुआई वाली बेंच ने कहा कि चुनाव आयोग को एसआईआर के लिए विशेष प्रक्रिया अपनाने का अधिकार है और यह मनमाना नहीं है। कोर्ट ने चुनाव आयोग को संदिग्ध नागरिकता के आधार पर वोटर लिस्ट से हटाए गए व्यक्तियों के नाम चार हफ्ते में केंद्र सरकार को भेजने का निर्देश भी दिया है।
बिहार से SIR की शुरुआत
चुनाव आयोग ने 11 महीने पहले विधानसभा चुनाव वाले बिहार से SIR की शुरुआत की थी। इसके बाद पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी में SIR कराया गया। असम में स्पेशल रिवीजन हुआ था। इन राज्यों में करीब 2.65 करोड़ वोटर के नाम कटे थे। सबसे पहले बिहार एसआईआर का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। इस प्रक्रिया के खिलाफ इन राज्यों से कई याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट पहुंची थीं। कुल कितनी याचिकाएं थीं इसकी जानकारी नहीं है।
1 अक्टूबर 2025 को जारी हुई थी फाइनल लिस्ट
बिहार में 2003 के बाद पहली बार एसआईआर प्रक्रिया चली। इसे 24 जून 2025 को शुरू किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य था, फर्जी जैसे विदेशी नागरिकों, दोहराए गए और स्थानांतरित मतदाताओं को सूची से हटाना और नए योग्य मतदाताओं को जोड़ना। निर्वाचन आयोग ने 30 सितंबर 2025 को फाइनल वोटर लिस्ट जारी की थी। बाद में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर हटाए गए वोटर्स की सूची और कारण भी सार्वजनिक किए गए थे।



