Anti Conversion Bill: महाराष्ट्र विधानसभा में सोमवार रात धर्म की स्वतंत्रता विधेयक-2026 को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया. धर्मांतरण विरोधी विधेयक में कड़े प्रावधान किए गए हैं जिनका मकसद जबरदस्ती, धोखाधड़ी प्रलोभन और विवाह के माध्यम से किए जाने वाले धर्मांतरण पर रोक लगाना है. इस विधेयक के अनुसार, शादी के बहाने गैरकानूनी रूप से धर्मांतरण करने वालों को 7 साल कैद की सजा दी जाएगी और 1 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया जाएगा. बता दें कि इसी तरह का कानून यूपी, एमपी, हरियाणा, गुजरात, ओडिशा, झारखंड और कर्नाटक में पहले से ही लागू है.
जबरन धर्म बदलवाने वालों की खैर नहीं
विधेयक के अनुसार, मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति, नाबालिग, महिला या अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के संबंध में किए गए उल्लंघन के लिए 7 साल कारावास और 5 लाख रुपये जुर्माने का प्रावधान है. वहीं बार-बार अपराध करने वालों को 10 साल की कैद और 5 लाख रुपये का जुर्माना भी हो सकता है. बिल के अनुसार, धर्म परिवर्तन के बाद पैदा हुआ बच्चा उसी धर्म का माना जाएगा. जिस धर्म को उसकी मां शादी के पहले मानती थी.
कांग्रेस-समाजवादी पार्टी ने धर्मांतरण कानून पर क्या कहा?
कांग्रेस नेता नाना पटोले ने महाराष्ट्र धर्मांतरण कानून 2026 पर कहा कि सरकार की ये जो दमनकारी प्रवृत्ति है, वो कल सामने आई. जिस तरह से वे धार्मिक स्वतंत्रता के नाम पर अपील लाए हैं, उसके तहत सरकार दमनकारी व्यवस्था बनाना चाहती है. आर्टिकल 25 के आधार पर संविधान में ही हमें व्यक्तिगत व धार्मिक स्वतंत्रता दी गई है लेकिन उसे रद्द करने व दमनकारी व्यवस्था को स्थापित करने का काम महाराष्ट्र में भाजपा और उसके गठबंधन दल कर रहे हैं. ये दमनकारी व्यवस्था जब-जब सामने आई है उसे महाराष्ट्र की जनता ने हटा दिया है. ये अब तक का इतिहास है. सरकार कल जो बिल लाई वो दमनकारी व्यवस्था का बिल है.
महाराष्ट्र समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अबू आसिम आज़मी ने कहा कि अब बहुमत के बल पर कोई भी बिल पास हो सकता है लेकिन समाजवादी पार्टी इस बिल का खुला विरोध करती है. ये भारतवर्ष के संविधान के खिलाफ है. इस देश में कौन किससे बात करेगा, उसकी निजता को रखने का हमें पूरा अधिकार है। वो क्या खाएगा, पीएगा या किस धर्म को अपनाएगा, 18 साल की उम्र के बाद उसे पूरी अनुमति है. ये मौलिक अधिकार का हनन है. इस बिल का हम खुला विरोध करते हैं.



