Plague : रूस में एक एंटी-प्लेग रिसर्च इंस्टीट्यूट में विस्फोट हो जाने से से हड़कंप मच गया है। यह इंस्टीट्यूट साइबेरिया इलाके में है जहां एक लैब कर्मचारी की मौत के बाद प्लेग फैलने की आशंका से हड़कंप मचा हुआ है। मामला इसलिए ज्यादा गंभीर है क्योंकि जिस महिला की मौत हुई, वह खुद रूस के एक एंटी-प्लेग रिसर्च इंस्टीट्यूट में काम करती थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उसके संपर्क में आए करीब 200 लोगों को मेडिकल निगरानी में रखा गया है। कई अस्पतालों में क्वारंटीन जैसे कदम उठाए गए हैं और एक इंडस्ट्रियल प्लांट में कर्मचारियों के लिए मास्क अनिवार्य किया गया। हालांकि, रूस ने अभी तक यह पुष्टि नहीं की है कि महिला की मौत प्लेग से हुई थी। इसी वजह कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में इसे वुहान पार्ट-2 भी कहा जा रहा है। ये भी दावा किया जा रहा है कि यह कोविड से 100 गुना ज्यादा जानलेवा है।
अमेरिका का अरोप-जैविक हथियारों पर काम
जानकारी के अनुसार अमेरिकी खुफिया एजेंसियों का कहना है कि रूस में अब भी जैविक हथियारों पर काम हो रहा है. इन कार्यक्रमों को गुप्त रखा जाता है. इन जगहों की बाहर से जांच नहीं होती. अंदर भी किसी गलती या हादसे की जानकारी सामने लाने की कोशिश कम होती है। 1979 में सोवियत यूनियन के स्वेर्दलोव्स्क में एक मिलिट्री फैसिलिटी से एन्थ्रेक्स बीजाणु के कण बाहर निकल गए थे. इस हादसे में 66 लोगों की मौत हुई थी. जबकि घटना की सच्चाई कई साल बाद सामने आई।
25 सितंबर को क्या हुआ था?
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार रूस के इरकुत्स्क क्षेत्र के शेलेखोव में स्थित इर्कुत्स्क एंटी-प्लेग रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ साइबेरिया एंड द फार ईस्ट की 28 साल की लैब टेक्नीशियन दार्या शिपिलोवा इस मामले की अहम कड़ी हैं. लोकल मीडिया की रिपोर्ट्स के मुताबिक, 25 सितंबर को काम के दौरान उनके हाथ से एक टेस्ट ट्यूब टूट गई थी. दावा है कि इसमें येर्सिनिया पेस्टिस नाम का बैक्टीरिया था, जो प्लेग का कारण बनता है।
लैब महिला कर्मचारी की मौत
रिपोर्ट के मुताबिक, इसके बाद शिपिलोवा की तबीयत बिगड़ने लगी. उन्हें 29 सितंबर को शेलेखोव के डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया. उन्हें गंभीर न्यूमोनिया जैसे लक्षण थे, हालत बिगड़ने पर उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया. लेकिन 1 और 2 अक्टूबर के बीच उनकी मौत हो गई. हालांकि, इस पूरी कहानी अभी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। रूस की हेल्थ मॉनिटरिंग एजेंसी रोस्पोट्रेबनादजोर ने इसे अज्ञात कारण का न्यूमोनिया बताया है. एजेंसी का कहना है कि मरीज के सैंपल की जांच में ऐसा कोई सूक्ष्मजीव नहीं मिला, जिसका संबंध उसके पेशेवर काम से हो. एजेंसी ने यह भी कहा कि संस्थान में रोगजनक सूक्ष्मजीव से जुड़ी किसी दुर्घटना की पुष्टि नहीं हुई है।
फिर 200 लोगों को निगरानी में क्यों ?
शिपिलोवा के संपर्क में आने वाले लोगों की पहचान की गई. अलग-अलग रिपोर्टों में यह संख्या 197 बताई गई है और इनमें से 189 लोगों को अस्पतालों में निगरानी के लिए रखा गया. कुछ रिपोर्टों के मुताबिक 114 लोग एक मेडिकल सेंटर, 63 दूसरे केंद्र और 12 लोग एंटी-प्लेग संस्थान में निगरानी में थे. अभी तक इन लोगों में प्लेग के संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई है। इरकुत्स्क और शेलेखोव में 5 अस्पतालों में क्वारंटीन की खबरें भी सामने आई हैं. रिपोर्टों के मुताबिक कुछ अस्पतालों में 3 हफ्ते तक प्रतिबंध लगाए गए. वहीं शेलेखोव स्थित इरकुत्स्क एल्युमिनियम प्लांट में 3 अक्टूबर से एहतियात के तौर पर मास्क अनिवार्य किया गया।
अमेरिका भी क्यों कर रहा है निगरानी?
मामला अब रूस तक सीमित नहीं है. अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा है कि उन्हें इरकुत्स्क में संदिग्ध न्यूमोनिक प्लेग के घातक मामले की जानकारी मिली है. अमेरिका सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल और दूसरी एजेंसियों के साथ हालात पर नजर रख रहा है. अमेरिका ने यह भी कहा कि कई तथ्यों की अभी पुष्टि नहीं हुई है. उसने रूस से सही जानकारी तेजी से और पारदर्शी तरीके से साझा करने को कहा है।
प्लेग कितना खतरनाक है?
प्लेग येर्सिनिया पेस्टिस नाम के बैक्टीरिया से होने वाली बीमारी है. आम तौर पर यह छोटे स्तनधारियों और उनके पिस्सुओं में पाया जाता है. इंसानों में यह संक्रमित पिस्सू के काटने, संक्रमित टिशू या शरीर के तरल पदार्थ के संपर्क और कुछ मामलों में संक्रमित सांस की बूंदों से फैल सकता है। रिसर्च के मुताबिक, इसके तीन प्रमुख रूप ब्यूबोनिक, सेप्टीसीमिक और न्यूमोनिक प्लेग है। न्यूमोनिक प्लेग सबसे गंभीर रूप है।
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