RBI : दुनिया भर में उथल-पुथल से मंहगाई बढी है और उसका असर आम उपभोक्ता पर पड रहा है लेकिन RBI ने सस्ते लोन या EMI के कम होने की उम्मीद पर पानी फेर दिया है। RBI की तीन दिन चली बैठक के बाद गवर्नर ने ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। अगर आप घर, गाड़ी या पर्सनल जरूरत के लिए सस्ते लोन का इंतजार थे तो तो फिलहाल ये उम्मीद पूरी नहीं हो सकेगी।
RBI की बैठक
RBI की मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी, यानी MPC की तीन दिन चली बैठक के बाद गवर्नर संजय मल्होत्रा ने आज 5 अगस्त को बताया कि दुनियाभर में जारी उठापटक की वजह से महंगाई बढ़ी है। इसके चलते फिलहाल ब्याज दरों 5.25 प्रतिशत में कोई बदलाव नहीं किया गया है। RBI का यह फैसला अपनी बचत के पैसे बैंक में रखने वालों के लिए राहत भरा है, क्योंकि एफडी पर मिलने वाला ब्याज फिलहाल कम नहीं होगा। हालांकि, सभी बैंक ब्याज दरें एक जैसी नहीं रखते, वे अपनी लागत और बाजार को देखकर इसमें थोड़ा बदलाव कर सकते हैं।
रेपो रेट क्या होता है?
रेपो रेट वह ब्याज दर है, जिस पर RBI बैंकों को कम समय के लिए कर्ज देता है। इसी दर के आधार पर बैंक अपने लोन की ब्याज दर तय करते हैं। RBI की मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी, यानी एमपीसी हर तीन महीने में इसकी समीक्षा करती है।
रेपो रेट बदलने से EMI पर क्या असर पड़ता है?
अगर रेपो रेट बढ़ता है, तो बैंकों के लिए कर्ज महंगा हो सकता है। इससे होम, कार और पर्सनल लोन की ब्याज दर और EMI बढ़ सकती है। वहीं, रेपो रेट घटने पर लोन सस्ते होने और EMI कम होने की संभावना रहती है। हालांकि, इसका असर उन लोन पर ज्यादा पड़ता है, जिनकी ब्याज दर रेपो रेट से जुड़ी होती है।
RBI ने रेपो रेट क्यों नहीं घटाया?
RBI के मुताबिक दुनिया में अभी हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हैं। कई देशों में तनाव बना हुआ है, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव हो रहा है। इसका असर सामान ढोने की लागत और रोजमर्रा की चीजों की कीमतों पर पड़ सकता है। ऐसे में अगर RBI अभी ब्याज दर घटा देता, तो बाजार में पैसा बढ़ जाता और महंगाई और बढ़ने का खतरा रहता। इसी वजह से RBI ने फिलहाल रेपो रेट 5.25 प्रतिशत पर ही रखा।
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