Karnataka Politics: सिद्धारमैया के इस्तीफ़े और प्रेस कॉन्फ्रेंस पर भाजपा नेता शहज़ाद पूनावाला की प्रतिक्रिया आई है. उन्होंने कहा कि इतने दुखी मन से आज सिद्धारमैया ने अपना इस्तीफा दिया है. उनके चेहरे पर दुख दिखाई दे रहा था कि लोकप्रियता पर पैसा हावी हो गया. लेकिन एक तरह से अच्छा है कि बिना रुके जो ओटीटी सीरीज चल रही थी, किस्सा कुर्सी का, कौन बनेगा मुख्यमंत्री, गेम ऑफ थ्रोन्स आज उम्मीद है समाप्त हो गई है. कांग्रेस पार्टी अब सत्ता की नहीं जनता की चिंता करेगी. कांग्रेस पार्टी अब कुर्सी की नहीं लोगों की, मतलब सत्ता की नहीं जनता की परवाह करेगी, जो कर्नाटक में गड्ढों वाली सड़कें, जलभराव वाली सड़कें, महिला सुरक्षा, कानून-व्यवस्था को लेकर चिंता करेगी.
“राहुल गांधी बड़े दिनों से ज्ञान बांट रहे थे”
शहज़ाद पूनावाला ने आगे कहा कि अब सवाल बनता है कि राहुल गांधी बड़े दिनों से ज्ञान बांट रहे थे कि जितनी आबादी उतना हक, जाति जनगणना, ओबीसी. अब तो मैं उनकी मुख्यमंत्रियों की सूची देखता हूं तो सिद्धारमैया मुख्यमंत्री नहीं रहे. सुक्खू हैं, सतीश हैं, रेवंत रेड्डी हैं. दूरबीन से भी देखने पर ओबीसी समाज से कोई नहीं दिख रहा. हमारे यहां तो प्रधानमंत्री ओबीसी समाज से हैं. मोहन यादव भी हैं, एसटी समाज से भी हैं पर इनके यहां पर जितनी आबादी उतना हक वाला जो नारा था वह शायद राहुल गांधी पूरा नहीं कर रहे. पता नहीं राहुल के सिद्धांत और हाथी के दांत खाने के अलग, दिखाने के अलग. खैर, कर्नाटक में पैसे की ताकत ने मुख्य लोकप्रियता पर भारी पड़ते हुए यह दिखाई दे रहा है.
“कांग्रेस का सर्वनाश निश्चित है”
भाजपा सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने सिद्धारमैया के इस्तीफ़े पर कहा कि कांग्रेस में कहीं कुछ ठीक नहीं चल रहा है. कांग्रेस का सर्वनाश निश्चित है और इसी कारण कांग्रेस अंदरद्वंद्व और कलेश से जूझ रही है. कहीं पर इस्तीफ़ा होता है, तो कहीं पर लोग पार्टी छोड़कर जाते हैं. इससे साफ़ जाहिर होता है कि कांग्रेस वो डूबती नाव है कि उसमें अब कोई और अधिक समय तक सवार नहीं होना चाहता है.
“राज्य की स्थिति को संभालने में असफल रहे”
शिवसेना नेता मनीषा कायंदे ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के इस्तीफ़े पर कहा कि कांग्रेस ने कर्नाटक राज्य तो जीत लिया, लेकिन वहां आज भी अस्थिरता है. यह अस्थिरता इसलिए है क्योंकि पार्टी का शीर्ष नेतृत्व चाहे वो सोनिया गांधी हो या राहुल गांधी हो, वो राज्य की स्थिति को संभालने में असफल रहे हैं.



