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हिमंता के ‘मामा-मियां’ वाले चक्रव्यूह में फंसी विपक्षी पार्टियां, असम में बीजेपी की हैट्रिक

Assam Vidhan Sabha Election Result

Assam Vidhan Sabha Election Result:असम में 126 विधानसभा सीटों के लिए मतगणना जारी है. शुरुआती रुझानों में भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाला नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (एनडीए) बढ़त बनाए हुए है. हालांकि, गुवाहाटी स्थित बीजेपी दफ़्तर में बीती रात ही जीत के पोस्टर लगा दिए गए थे. इन पोस्टरों में लिखा था, “अभूतपूर्व जनसमर्थन और आशीर्वाद के लिए असम की जनता को हार्दिक धन्यवाद! पार्टी के राज्य कोषाध्यक्ष राजकुमार सरमा ने कहा कि हमें पहले से ही भरोसा था कि जीत हमारी ही होगी. इसलिए हमने बीती रात ही जनता का धन्यवाद करते हुए पोस्टर लगा दिए. फिलहाल पार्टी कार्यालय में खास चहल-पहल नहीं दिख रही है। वहां मौजूद लोगों के अनुसार, अधिकतर कार्यकर्ता अभी मतगणना केंद्रों पर हैं. दोपहर तक दफ्तर में भीड़ बढ़ने की उम्मीद है और यदि रुझान नतीजों में बदलते हैं तो जश्न मनाया जाएगा. असम में इस बार मुख्य मुकाबला दो गठबंधनों के बीच है. एक तरफ बीजेपी के नेतृत्व वाला एनडीए है, जो लगातार तीसरी बार सत्ता में आने की कोशिश कर रहा है, जबकि दूसरी ओर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नेतृत्व वाला गठबंधन उसे कड़ी टक्कर दे रहा है.

हिमंत बिस्वा सरमा की जीत के केंद्र में दो ही शब्द सबसे ज्यादा प्रभावशाली रहे, जिन्होंने असम की सत्ता की चाबी एक बार फिर बीजेपी को सौंप दी. ये दो शब्द हैं-‘मामा’ और ‘मियां’. इन्हीं दो शब्दों के इर्द-गिर्द हिमंत बिस्वा सरमा ने अपनी ऐसी बिसात बिछाई कि विपक्ष के पास डिफेंस का कोई मौका ही नहीं बचा.

मामा’ की छवि ने महिलाओं को बनाया मजबूत और वफादार वोट बैंक
असम की गलियों में आज छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्ग महिलाओं तक, हर किसी के लिए हिमंत बिस्वा सरमा सिर्फ मुख्यमंत्री नहीं, बल्कि अपने ‘मामा’ बन चुके हैं. आमतौर पर नेता खुद को जनता का सेवक या प्रतिनिधि बताते हैं, लेकिन हिमंत ने लोगों के साथ एक पारिवारिक रिश्ता बनाने की रणनीति अपनाई. इस ‘मामा’ ब्रांडिंग के पीछे महिलाओं को केंद्र में रखकर तैयार किया गया एक मजबूत और वफादार वोट बैंक था. उन्होंने यह समझा कि अगर घर की महिला संतुष्ट है, तो पूरे परिवार का समर्थन सुनिश्चित हो जाता है. ‘अरुणोदयी 2.0’ जैसी कैश ट्रांसफर योजनाओं के जरिए सीधे महिलाओं के बैंक खातों में आर्थिक सहायता पहुंचाई गई. जहां एक ओर कांग्रेस महंगाई को मुख्य मुद्दा बनाती रही, वहीं ग्रामीण महिलाओं के लिए ‘मामा’ की यह सीधी मदद बड़ा सहारा साबित हुई. इस आर्थिक सहयोग ने हिमंत को हर घर का सदस्य बना दिया, और महिलाओं ने उनके समर्थन में बढ़-चढ़कर मतदान किया.

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‘मियां’ राजनीति और अस्मिता के सवाल पर सख्त रुख
जहां ‘मामा’ शब्द अपनापन और विश्वास का प्रतीक बना, वहीं ‘मियां’ शब्द का इस्तेमाल हिमंत बिस्वा सरमा ने एक सशक्त राजनीतिक रणनीति के रूप में किया. असम में जनसंख्या संतुलन और घुसपैठ जैसे मुद्दे लंबे समय से संवेदनशील रहे हैं. हिमंत ने इन विषयों पर सख्त और स्पष्ट रुख अपनाते हुए ‘नो कॉम्प्रोमाइज’ की छवि बनाई. चुनावी रैलियों में उन्होंने ‘मियां पॉलिटिक्स’ को खुलकर निशाना बनाया और इसे असमिया संस्कृति के लिए खतरे के रूप में प्रस्तुत किया. इस रणनीति ने स्वदेशी असमिया मतदाताओं का ध्रुवीकरण कर उन्हें बड़े पैमाने पर बीजेपी के पक्ष में संगठित किया. मदरसों को बंद करने और कथित ‘लैंड जिहाद’ के खिलाफ सख्त कदमों ने हिंदू मतदाताओं को एकजुट करने में भूमिका निभाई. दूसरी ओर, कांग्रेस इस मुद्दे पर कमजोर नजर आई. जैसे ही कांग्रेस धर्मनिरपेक्षता की बात करती, बीजेपी उसे ‘मियां तुष्टीकरण’ का आरोप देकर घेर लेती, जिससे विपक्ष का चुनावी समीकरण प्रभावित हुआ.

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