Gaza : आठ मुस्लिम बहुल देशों ने इजराइल के रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज और राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-ग्वीर के बयानों की कड़ी निंदा की। दोनों नेताओं ने गाजा से फिलिस्तीनियों को हटाने की योजना बनाने की बात कही थी।
इन देशों ने की निंदा
सऊदी अरब, जॉर्डन, यूएई , तुर्किये, कतर, मिस्र, इंडोनेशिया और पाकिस्तान के विदेश मंत्रियों ने संयुक्त बयान में कहा कि ऐसे बयान और भड़काऊ प्रस्ताव अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का खुला उल्लंघन हैं। ये फिलिस्तीनी लोगों के अधिकारों के लिए सीधा खतरा हैं। इन विदेश मंत्रियों ने चेतावनी दी कि अगर गाजा के लोगों को जबरन हटाया गया, तो इसके गंभीर नतीजे होंगे। इससे शांति की कोशिशों को नुकसान पहुंच सकता है।
अमेरिका तैयार हुआ तो गाजा खाली करा देंगे
इजराइल के रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने 2 सितंबर बुधवार को कहा था कि अगर अमेरिका मंजूरी देता है तो हम गाजा से फिलिस्तीनियों को बाहर निकाल देंगे। उन्होंने आगे बताया था कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने फिलहाल इस योजना को फ्रीज किया है। इजराइल अमेरिका के फैसले का इंतजार कर रहा है कि इन लोगों को कहां भेजा जाएगा।
ट्रम्प ने रखा था प्रस्ताव
ट्रम्प ने फरवरी 2025 में पहली बार गाजा की करीब 23 लाख आबादी को दूसरी जगह बसाने का प्रस्ताव रखा था। हालांकि काट्ज ने यह भी माना था कि फिलहाल कोई भी देश इतनी बड़ी संख्या में गाजा के लोगों को अपने यहां लेने के लिए तैयार नहीं है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में कहा था कि गाजा के करीब 20 लाख फिलिस्तीनियों को वहां से चले जाना चाहिए। ट्रम्प ने गाजा को फिर से बसाने और उसे भूमध्यसागर के किनारे एक लग्जरी रिसॉर्ट में बदलने की बात कही थी।
इजिप्ट के विरोध के बाद पीछे हटे ट्रम्प
ट्रम्प के इस प्रस्ताव का कई देशों ने विरोध किया था। इनमें मिस्र भी शामिल था। मिस्र, इजराइल के अलावा गाजा से सीमा साझा करने वाला इकलौता देश है। फिलिस्तीनियों ने भी इस प्रस्ताव का विरोध किया। उनका कहना था कि अगर उन्हें उनकी जमीन से जबरन हटाया गया तो यह उन्हें 1948 की याद दिलाएगा, जब इजराइल के बनने के दौरान बड़ी संख्या में फिलिस्तीनियों को अपना घर छोड़ना पड़ा था। फिलिस्तीनी इस घटना को ‘नकबा’ यानी तबाही कहते हैं। बाद में अक्टूबर में गाजा में युद्धविराम का ऐलान करते हुए ट्रम्प ने इलाके के लिए 20 बिंदुओं वाली योजना पेश की। इसमें फिलिस्तीनियों को गाजा से जबरन हटाने की बात नहीं थी।
लोग गाजा छोड़ने को तैयार
इजराइल के कट्टरपंथी नेता इतामार बेन ग्वीर ने गाजा की ज्यादातर फिलिस्तीनी आबादी को इलाके से बाहर निकालने की योजना पेश की थी। उन्होंने इसे स्वैच्छिक पलायन बताया था। काट्ज ने भी दावा किया कि गाजा के 80 प्रतिशत लोग वहां से जाना चाहते हैं, लेकिन हमास उन्हें ऐसा करने से रोक रहा है। इस योजना में एक अलग सरकारी मंत्रालय बनाने की बात भी शामिल है। बेन ग्वीर ने कहा था कि अगर अक्टूबर के आखिर में होने वाले चुनाव के बाद उनकी गठबंधन सरकार सत्ता में रहती है तो वे इस योजना को आगे बढ़ाने की कोशिश करेंगे।
इजराइली सेना पीछे नहीं हटेगी
इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि इजराइली सेना पीछे नहीं हटेगी। उन्होंने कहा कि इस इलाके को नियंत्रित कर रहे हैं। हम पीछे नहीं हट रहे हैं। हम यलो लाइन पर बने रहेंगे। यलो लाइन गाजा के उन इलाकों को अलग करती है, जो हमास और इजराइली सेना के नियंत्रण में हैं। उन्होंने आगे कहा कि हम गाजा पट्टी के 60% हिस्से को नियंत्रित करते हैं और हम रुकने वाले नहीं हैं, क्योंकि हम उन आतंकियों को खत्म कर रहे हैं जो हर दिन हमें धमकी देते हैं।
हमास के हमले और गाजा में मौतों का आंकड़ा
हमास के हमले के बाद इजराइली हमलों के कारण गाजा की बड़ी आबादी पहले ही अपने ही इलाके में विस्थापित हो चुकी है। इजराइली आंकड़ों के अनुसार, हमले में 1,221 लोग मारे गए थे। गाजा स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इसके बाद इजराइल के हमलों में 73,470 लोगों की मौत हुई है। उसके मुताबिक युद्धविराम के बाद भी 1,330 से ज्यादा लोग मारे गए हैं।
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