Raksha Bandhan : आज रक्षा बंधन है। बहनें अपने भाई को राखी बांधती है और भाई अपनी बहन की रक्षा करने का वचन देता है। राखी बांधने की परंपरा कहां से शुरु हुई और यह कितनी पुरानी परंपरा है इस बारे में पुरानी किताबों में जिक्र है।
अर्थवेद में जिक्र
रक्षाबंधन आज भाई-बहन का त्योहार है, लेकिन हजारों साल पहले इसका रूप अलग था। अथर्ववेद में रक्षा के लिए सोना और मणि बांधने का जिक्र है। रामायण में वनवास से पहले कौशल्या ने राम के लिए औषधि से रक्षा सूत्र तैयार किया था। भविष्योत्तर पुराण में श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को सावन महीने की पूर्णिमा पर रक्षाबंधन करने की पूरी विधि बताई।
मुगल दौर में राखी
13वीं सदी तक यह तय नियम और मंत्र वाला धार्मिक कर्म बन चुका था। फिर अकबर के दौर में रक्षाबंधन मुगल दरबार तक पहुंचा और जहांगीर ने अपनी आत्मकथा में लिखा कि इस धागे को राखी नाम दिया। 18वीं सदी में राजपूत महिलाएं राजाओं के लिए राखियां लेकर आती थीं और 19वीं सदी में राखी देकर किसी भी पुरुष को भाई बनाने की परंपरा शुरू हुई।
आज शात सात बजे तक मुहूर्त
बता दें कि आज सावन महीने की पूर्णिमा है। इस बार भद्रा नहीं होने से दिनभर में राखी बांधने के लिए सुबह 6.15 से शाम 7 बजे तक 3 शुभ मुहूर्त हैं। ग्रंथों में सूर्याेदय से सूर्यास्त तक ही रक्षाबंधन करने की परंपरा है।
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