Shubham Rewad : राजस्थान विश्वविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव की बहाली और राजस्थानी भाषा विभाग की मांग को लेकर अनशनरत छात्र नेता शुभम रेवाड़ से मिलने जयपुर कलेक्टर स्वयं SMS हॉस्पिटल पहुंचे। दोनों के बीच हुई वार्ता बेहद सकारात्मक माहौल में संपन्न हुई। वार्ता के दौरान प्रशासन ने विश्वविद्यालय में जल्द ‘राजस्थानी भाषा विभाग’ खोलने की मांग को स्वीकार कर लिया है, वहीं छात्रसंघ चुनाव कराने की मांग पर कलेक्टर ने उच्च स्तर पर सरकार से वार्ता कर जल्द सकारात्मक निर्णय निकालने का ठोस आश्वासन दिया है। बुधवार को राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत छात्र नेता शुभम रेवाड से मिलने एसएमएस हॉस्पीटल पहुँचें. शुभम रेवाड़ को पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पानी पिलाया। गहलोत ने अनशन कर रहे शुभम रेवाड़ की बिगड़ती तबीयत पर चिंता जताई।
राज्य सरकार से जल्द निर्णय लेने की अपील
इस दौरान गहलोत ने छात्रसंघ चुनाव बहाल करने की मांग का समर्थन करते हुए राज्य सरकार से जल्द निर्णय लेने की अपील की। गहलोत ने कहा- छात्रसंघ चुनाव बहाल करना छात्रों की पूरी तरह जायज मांग है। सरकार को इसे अनावश्यक रूप से लंबित नहीं रखना चाहिए। उन्होंने कहा- छात्र राजनीति लोकतंत्र की पहली पाठशाला होती है और देश के अनेक बड़े नेता छात्रसंघ चुनावों से निकलकर राष्ट्रीय राजनीति तक पहुंचे हैं।
बिना पानी और इलाज के बिगड़ी तबीयत, डॉक्टरों की निगरानी में
लंबे समय से जारी अनशन और चिकित्सा सहायता नहीं लेने के फैसले के बाद शुभम रेवाड़ की स्वास्थ्य स्थिति गंभीर बताई जा रही है। अस्पताल में डॉक्टरों की टीम लगातार उनके वाइटल्स और कीटोन स्तर की निगरानी कर रही है। चिकित्सकों के अनुसार, यदि लंबे समय तक पानी और उपचार नहीं लिया गया तो स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। अस्पताल के बाहर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है और छात्र समर्थकों की आवाजाही लगातार बनी हुई है।
प्रदेशभर से छात्रों का समर्थन मिलने का दावा
आंदोलन से जुड़े छात्र संगठनों का कहना है कि सूरतगढ़, बीकानेर, जोधपुर और सीकर सहित प्रदेश के कई जिलों से छात्रों का समर्थन मिल रहा है। समर्थकों का दावा है कि आंदोलन को लेकर युवाओं में लगातार आक्रोश बढ़ रहा है। छात्र प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि सरकार उनकी मांगों पर गंभीरता नहीं दिखा रही है। उनका कहना है कि यदि शुभम रेवाड़ के स्वास्थ्य को कोई गंभीर नुकसान होता है तो इसकी नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी राज्य सरकार और प्रशासन की होगी। साथ ही चेतावनी दी गई कि मांगों की अनदेखी जारी रही तो आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है।
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