Reliance Industries: अमेरिका-ईरान युद्ध और रूस के निर्यात प्रतिबंध की वजह से दुनिया के कई हिस्सों में डीजल सप्लाई पर संकट छाया है। जानकारी के अनुसार इसी के चलते यूरोप में डीजल की भारी कमी हो गई है। ऐसे में भारतीय कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज ने जुलाई में यूरोप और ब्राजील को डीजल का निर्यात बढ़ा दिया है। इससे वैश्विक बाजार में डीजल की सप्लाई को कुछ राहत मिल सकती है।
रिलायंस का यूरोप को सबसे ज्यादा निर्यात
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार यूरोप में डीजल का स्टॉक 2014 के बाद सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। वहीं पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव की वजह से खाड़ी देशों से यूरोप को होने वाली सप्लाई भी प्रभावित हुई है। इसका असर यह हुआ कि यूरोप में डीजल का मुनाफा (मार्जिन) बढ़कर रिकॉर्ड 74 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया।
रिपोर्ट के मुताबिक, रिलायंस ने जुलाई में अपने जामनगर रिफाइनरी से करीब 40 लाख से 50 लाख बैरल डीजल यूरोप भेजा। यह अमेरिका-ईरान युद्ध शुरू होने से पहले के स्तर पर लौट आया है और पिछले 10 महीनों का सबसे ज्यादा निर्यात है।
रूस के फैसले से भी मिला मौका
जानकारी के अनुसार रूस ने जुलाई के ज्यादातर समय के लिए डीजल निर्यात पर रोक लगा रखी थी। इसकी वजह यूक्रेन के ड्रोन हमलों में कई रूसी रिफाइनरियों को हुआ नुकसान है। रिपोर्ट के मुताबिक, रूस अगस्त में भी इस प्रतिबंध को जारी रख सकता है। ऐसे में भारत के रिफाइनरों को वैश्विक बाजार में ज्यादा मौके मिल रहे हैं। रिलायंस ने सिर्फ यूरोप ही नहीं, बल्कि ब्राजील को भी डीजल की सप्लाई बढ़ाई है। जुलाई में भारत से ब्राजील को करीब 28 लाख बैरल डीजल भेजा जा सकता है, जो पिछले 11 महीनों का सबसे ऊंचा स्तर होगा। वहीं रूस से ब्राजील को होने वाला डीजल निर्यात करीब चार साल के सबसे निचले स्तर पर आ गया है।
क्या अगस्त में भी जारी रहेगी तेजी?
रॉयटर्स के हवाले से कमोडिटी एनालिटिक्स फर्म Sparta Commodities के कमोडिटीज हेड जेम्स नोएल-बेसविक (James Noel-Beswick) का कहना है कि अगस्त में यूरोप को भारतीय डीजल की सप्लाई इस बात पर निर्भर करेगी कि यूरोप एशियाई खरीदारों से ज्यादा कीमत देने को तैयार है या नहीं। फिलहाल एशिया में भी डीजल की मांग मजबूत है और वहां डीजल का मार्जिन चार महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गया है। ऐसे में भारतीय रिफाइनरियों के लिए एशिया में डीजल बेचना भी फायदेमंद साबित हो सकता है।
भारत को कैसे हो रहा है फायदा?
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक है और पिछले एक साल में उसने ईंधन निर्यात तेजी से बढ़ाया है। भारत अब पूर्व और पश्चिम, दोनों बाजारों में डीजल की सप्लाई करने वाले अहम देशों में शामिल हो गया है। बढ़ती वैश्विक मांग और सप्लाई की कमी का फायदा भारतीय रिफाइनिंग कंपनियों, खासकर Reliance Industries को मिल रहा है।
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