KBP Times

शरीर में बनने वाली गांठ सामान्य नहीं समझें, ये हो सकता है साइलेंट कैंसर

Cancer can be silent

Cancer : कई बार हमारे शरीर में बनने वाली गांठ को हम अक्सर नजर अंदाज कर देते है और सामान्य बात मान लेते हैं लेकिन हर गांठ सामान्य नहीं होती. कई बार यह दुर्लभ लेकिन गंभीर कैंसर सारकोमा का संकेत भी हो सकती है. यह कैंसर हड्डियों, मांसपेशियों, फट नसों और अन्य कनेक्टिव टिशू में बनता है. हालांकि इसके शुरुआती लक्षण अक्सर सामान्य चोट, सूजन या सिस्ट जैसे लगते हैं, इसलिए इसका पता देर से चल पाता है. यही वजह है कि इसे कई बार साइलेंट कैंसर भी कहा जाता है। जानिए सारकोमा के लक्षण, कारण, इलाज और बचाव के बारे में इस लेख में जो वरिष्ठ चिकित्सक द्वारा बताए गए हैं –

सारकोमा क्या है?

सारकोमा कोई एक बीमारी नहीं बल्कि 70 से अधिक प्रकार के कैंसरों का समूह है. इसे मुख्य रूप से दो भागों में बांटा जाता है, सॉफ्ट टिश्यू सारकोमा, जो लगभग 80ः मामलों में पाया जाता है, और बोन सारकोमा, जो हड्डियों को प्रभावित करता है. भारत में इविंग सारकोमा, सिनोवियल सारकोमा और ऑस्टियोसारकोमा सबसे अधिक देखे जाने वाले प्रकार हैं.

भारत में कितना आम है सारकोमा?

डॉ. बताते हैं कि सारकोमा दुर्लभ कैंसर जरूर है, लेकिन भारत जैसे बड़े देश में इसके मरीजों की संख्या कम नहीं है. अनुमान के मुताबिक, प्रति 1 लाख लोगों में 1 से 2 मामले सामने आते हैं. वहीं, 0 से 14 वर्ष के बच्चों में होने वाले सभी कैंसरों में लगभग 3 से 4 प्रतिशत मामले सारकोमा के होते हैं. सारकोमा शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकता है, इसलिए इसके लक्षण भी अलग-अलग हो सकते हैं. इन संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.

-शरीर में बिना दर्द की गांठ दिखाई देना.
-गांठ का धीरे-धीरे आकार बढ़ना.
-लंबे समय तक बनी रहने वाली सूजन.
-बिना किसी चोट के लगातार हड्डी में दर्द.
-त्वचा के नीचे गहराई में महसूस होने वाली गांठ.
-गोल्फ बॉल के आकार से बड़ी गांठ.
-क्यों देर से पकड़ में आता है सारकोमा?

डॉक्टर बताते हैं कि सारकोमा के शुरुआती लक्षण अक्सर मांसपेशियों में खिंचाव, सिस्ट या सामान्य सूजन जैसे दिखाई देते हैं. इसी वजह से कई मरीज महीनों तक इलाज नहीं कराते या कई डॉक्टरों से सलाह लेने के बाद भी सही सॉल्यूशन नहीं हो पाता. इससे बीमारी आगे बढ़ सकती है.

बायोप्सी क्यों है सबसे जरूरी?

डॉ. के अनुसार, किसी भी संदिग्ध गांठ को हटाने से पहले बायोप्सी कराना बेहद जरूरी है. इससे यह स्पष्ट हो जाता है कि गांठ कैंसर है या नहीं और अगर है, तो उसका प्रकार क्या है. सही बायोप्सी के आधार पर ही इलाज की दिशा तय की जाती है. बिना जांच के गांठ निकाल देने से बाद में इलाज अधिक गंभीर हो सकता है.

यह भी पढ़ें –Eye Care; प्रतिदिन इस योगासन से कम हो सकता है चश्मे का नंबर, जानिए

यह भी देखें- 30 साल पुरानी कॉलोनियों पर JDA का शिकंजा, बुलडोजर के खिलाफ फूटा लोगों का गुस्सा

 

ताजा खबरें

ताजा खबरें

Strike Against Adulteration

मिलावट पर वार; केंद्रीय खाद्य सुरक्षा दल की झोटवाड़ाऔर मुहाना मंडी की फर्मों पर कार्रवाई

CJP and Delhi High Court

दिल्ली कोर्ट ने आशुतोष-सौरव की न्यायिक हिरासत दो दिन बढ़ाई; CJP का रिहाई में जानबूझकर देरी का आरोप

Pratap singh Khachriyawas

जयपुर में प्रताप खाचरियावास का आरोप- VLTD डिवाइस के नाम पर 1000 करोड़ का घोटाला

Shashi Tharoor MP

कांग्रेस सांसद थरूर बोले- हमारा मकसद SIR प्रक्रिया को वापस लेना, सरकार गिराना टारगेट नही

Delhi High Court

दिल्ली हाईकोर्ट ने दी दुष्कर्म की नाबालिग पीड़िता को गर्भपात की इजाजत

Cartoon

मास्टर जी सावधानी रखना…

selection commettee

BCCI में फेरबदल; प्रज्ञान ओझा चीफ सिलेक्टर बने, कमेटी में रमेश पोवर को किया शामिल

Questions of Oppositions

सत्ता से सवाल पूछने वाले खुद पर आरोपों का जवाब देंगे कब ?

Meta

केन्द्र सरकार ने मेटा से कहा-एक तरफा नैरेटिव वाला कंटेंट नहीं हो, एल्गोरिदम की करें समीक्षा

2

2