NEET and Coaching : नीट पेपर लीक होना देश के करोडों छात्रों के भविष्य को खराब कर गया है साथ ही उन अभिभावकों को चिंतित कर गया है जो अपने बच्चों को नीट की तैयारी कराने वाले थे या उसकी कोचिंग की फीस की जुगाड में लगे थे। निजी कोचिंग संस्थानों का प्रचार ही ऐसा होता है कि नीट के लिए हर अभिभावक अपने बच्चे को कोचिंग में एडमिशन कराए बिना रह नहीं पाता जहां पर सबसे पहले किताब नहीं, बैंक बैलेंस का टेस्ट होता है. कोंिचग संस्थान के एडमिशन काउंटर पर पहुंचते-पहुंचते कई परिवारों की सालों की बचत पसीना बहाने लगती है. लाखों रुपये की फीस जमा होती है, हॉस्टल का अलग खर्च, टेस्ट सीरीज अलग और बाकी इंतजाम अलग. इसके बाद दिखाई देती हैं हरी, नीली, लाल टी-शर्ट पहने मुस्कुराते छात्रों की बड़ी-बड़ी होडिंग्स. बस यही वो मंजर होता है जहां पैरेंट्स की आंखों में अपना बच्चा इन पोस्टर्स पर नजर आने लगता है।
डरावनी है करोड़ों की फीस की गणित
जानकारी के अनुसार औसतन नीट कोचिंग में दो साल का पैकेज 2 लाख से लेकर 6-7 लाख रुपए तक जाता है. इसमें हॉस्टल, मेस, टेस्ट सीरीज अलग से जोड़ दीजिए तो आंकड़ा और भी डरावना हो जाता है. मिडिल क्लास घर का बजट पूरा हिल जाता है। नीट की कोचिंग में एडमिशन के समय माहौल ऐसा होता है कि लगता है बस अब सफेद कोट पहनना बाकी है. सेमिनार में तालियां, ब्रॉशर में मुस्कुराते चेहरे होंगे, दीवारों पर ।प्त् 1 से लेकर ।प्त् 100 तक की तस्वीरें और हर दूसरी लाइन में लिखा होता है – आपका सपना, हमारी जिम्मेदारी. लेकिन जैसे ही परीक्षा पर विवाद हुआ, छात्र सड़क पर उतरे, जंतर-मंतर पर प्रदर्शन हुआ और पुलिस कार्रवाई हुई कोई भी कोचिंग वाला नजर नहीं आया.
नो कमेंट्स मोड में कोचिंग वाले
हर साल मई-जून का महीना, नीट का रिजल्ट लेकर आता है. साथ में आता है वही पुराना सवाल – जिन कोचिंग सेंटरों ने बच्चों से लाखों रुपए वसूले, वो अब कहां हैं. जब बात एडमिशन के फॉर्म भरने और गारंटीड सक्सेस के दावों की होती है, तब हर होर्डिंग पर इनका नाम चमकता है. लेकिन जैसे ही कोई गड़बड़ी सामने आती है, ये अचानक नो कमेंट मोड में चले जाते हैं.
पेपर लीक के तार भी कोचिंग से ही जुड़े
याद दिला दें कि इस साल नीट यूजी के तार भी कोचिंग से ही जुड़े थे. महाराष्ट्र के लातूर में स्थित त्ब्ब् यानी रेनुकाई केमिस्ट्री क्लासेस का लिंक पेपर सेटर के साथ था. ब्ठप् ने कोचिंग के निदेशक शिवराज मोटेगांवकर को गिरफ्तार किया था. जांच में पाया गया कि कोचिंग सेंटर के संचालक ने पेपर सेटर से नीट यूजी पेपर प्राप्त किए थे. मां-बाप जमीन बेचते हैं, लोन लेते हैं, गहने गिरवी रखते हैं बस इसलिए कि बच्चे का डॉक्टर बनने का सपना पूरा हो सके. और कोचिंग वाले इस भावना को बहुत अच्छे से भुनाना जानते हैं.
एक कोचिंग में नीट यूजी की फीस
एक बड़ी कोचिंग अपनी वेबसाइट पर दावा करती है कि नीट यूजी 2024 में 1,39,950 स्टूडेंट्स ने नीट परीक्षा पास की. मतलब एक स्टूडेंट की एवरेज फीस अगर 1.2 लाख भी है तो 16,794 करोड़ सिर्फ एक बैच से फीस कलेक्ट होता है. ये वो हैं जिन्होंने परीक्षा पास की है. फेल होकर पछताने वालों की तो गिनती ही नहीं है.
रिफंड मांगो तो सन्नाटा
अगर कोई पेरेंट्स कोर्स बीच में छोड़ने पर फीस वापस मांग लें, तो एग्रीमेंट की बारीक लाइनों का हवाला दे दिया जाता है. वही एग्रीमेंट जो एडमिशन के वक्त कोई ठीक से पढ़ता ही नहीं, क्योंकि उस वक्त बस एक ही चीज दिमाग में होती है – सीट पक्की करनी है.
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