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Giga Time AI; कैंसर के सही इलाज के लिए मेडिकल सांइस में एडवांस AI मॉडल

Giga Time AI model

Giga Time AI : कैंसर जैसी बीमारी के लिए मेडिकल सांइस में बडा बदलाव हुआ है। कैंसर के इलाज के लिए कौनसी दवा कारगर रहेगी इसके लिए एक एआई मॉडल तैयार किया है जिसका नाम गीगा टाइम एआई है। दरअसल कैसर एक ऐसी बीमारी है जिसका नाम सुनते ही पसीने छूट जाते हैं. क्योंकि आम लोगों को कैंसर के इलाज के लिए काफी जद्दोजहद करनी पड़ती है. कैंसर का इलाज तो महंगा होता ही है, लेकिन उससे भी ज्यादा खर्च इसके शुरुआती टेस्ट और जांच में हो जाता है. कई बार मरीजों को यह समझने के लिए कि कौन सी दवा या थेरेपी उन पर काम करेगी, लाखों रुपये खर्च करने पड़ते हैं. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने अब कैंसर के एक बहुत ही महंगे टेस्ट को आम लोगों की पहुंच में ला दिया है.

​क्या है यह पूरा मामला?

एक रिपोर्ट के मुताबिक माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ ने हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान मेडिकल साइंस में हुए इस बड़े बदलाव के बारे में बताया है. उन्होंने कहा कि मानव शरीर और उसकी बीमारियों को समझना सबसे मुश्किल कामों में से एक है. कैंसर के इलाज में एक थेरेपी होती है जिसे इम्यूनोथेरेपी कहा जाता है. यह थेरेपी हर मरीज के शरीर और उसके ट्यूमर पर अलग तरह से असर करती है. अब तक यह पता लगाने के लिए कि क्या कोई खास इम्यूनोथेरेपी किसी मरीज के ट्यूमर पर असर करेगी या नहीं, एक बेहद पेचीदा और महंगा टेस्ट करना पड़ता था. इस टेस्ट की कीमत करीब 100 डॉलर यानी भारतीय रुपयों में लाखों में होती है. इस टेस्ट में समय भी बहुत ज्यादा लगता था और पैसा भी पानी की तरह बहता था.

इम्यूनोथेरेपी क्या है?

इम्यूनोथेरेपी एक ऐसा इलाज है जो तुम्हारी बॉडी के अपने इम्यून सिस्टम को बीमारी से लड़ने के लिए ट्रेन करता है या तेज बनाता है.

एआई ने कैसे आसान कर दिया काम?

मरीजों की इसी बड़ी मुश्किल को दूर करने के लिए प्रोविडेंस यूनिवर्सिटी ऑफ वॉशिंगटन और माइक्रोसॉफ्ट रिसर्च के वैज्ञानिकों और रिसर्चर्स ने हाथ मिलाया है. इन सब ने मिलकर एक बेहद एडवांस एआई मॉडल तैयार किया है। जिसका नाम Giga Time रखा गया है।

क्या है गीगा टाइम एआई मॉडल और यह कैसे काम करता है?

​कैंसर का इलाज हर मरीज के लिए अलग होता है. डॉक्टरों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह होती है कि वे यह कैसे तय करें कि किस मरीज को कौन सी दवा या ‘इम्यूनोथेरेपी’ (Immunotherapy) दी जाए, जो उसके ट्यूमर को पूरी तरह खत्म कर सके. इसी मुश्किल को हल करने के लिए वैज्ञानिकों ने GigaTIME नाम का एक AI मॉडल तैयार किया है.

  1. ​GigaTIME (गिगाटाइम) एक बेहद एडवांस कंप्यूटर विज़न और मशीन लर्निंग मॉडल है. मेडिकल भाषा में कहें तो यह एक ‘डिजिटल सिमुलेशन टूल’ (Digital Simulation Tool) है.
  2. ​यह AI मॉडल मरीज के ट्यूमर और उसकी कोशिकाओं (Cells) के डिजिटल डेटा को बहुत गहराई से स्कैन करता है.
  3. पहले यह जानने के लिए कि कोई दवा कैंसर पर असर करेगी या नहीं, लैब में हफ्तों तक जटिल और महंगे बायोमार्कर टेस्ट करने पड़ते थे. GigaTIME उस पूरे प्रैक्टिकल टेस्ट को कंप्यूटर स्क्रीन पर ही वर्चुअली (Digitally) करके देख लेता है कि दवा ट्यूमर पर कैसे रिएक्ट करेगी.
  4. ​इसकी मदद से ऑन्कोलॉजिस्ट यह तुरंत जान सकते हैं कि मरीज के शरीर के लिए कौन सी इम्यूनोथेरेपी सबसे बेस्ट रहेगी. इससे गलत इलाज या गलत दवाओं पर होने वाला समय और पैसा दोनों बचेगा.

आम आदमी को क्या होगा फायदा?

सत्या नडेला का कहना है कि इस तकनीक के आने के बाद अब महंगे टेस्ट कराने के लिए बड़े-बड़े शहरों या विदेशों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे. देश के किसी भी छोटे शहर के सामान्य या जिला अस्पताल में भी डॉक्टर इस AI मॉडल की मदद से यह टेस्ट कर सकेंगे. ​जब यह टेस्ट हर छोटे-बड़े अस्पताल में उपलब्ध होगा, तो आम आदमी का खर्च बहुत कम हो जाएगा. सही समय पर सही इलाज मिलने से कैंसर के मरीजों की जान बचाना भी काफी आसान हो जाएगा. मेडिकल क्षेत्र में पैसों की इस बचत और तकनीक की हर जगह उपलब्धता को नडेला ने एक बहुत बड़ा बदलाव बताया है.

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