Sabrimala Temple : केरल के प्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर में इस साल भगवान अयप्पा के दर्शन करने वाले भक्तों को एक बिल्कुल नया और हाई-टेक अनुभव मिलने वाला है. पिछले साल की तरह इस बार भी लाखों की संख्या में भक्तों के आने की उम्मीद है, लेकिन इस बार भीड़ को संभालने के लिए केरल पुलिस और त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड ने सीधे एआई से हाथ मिला लिया है. घने जंगलों के बीच स्थित इस पवित्र धाम में अब ड्रोन, एआई कैमरे और प्रेडिक्टिव सिस्टम के जरिए सुरक्षा और व्यवस्था को संभाला जाएगा.
घने जंगल के बीच बना है मंदिर
सबरीमाला पहाड़ी मंदिर केरल के पथनमथिट्टा जिले में घने जंगलों के बीच स्थित है. पिछले साल इस तीर्थयात्रा सीजन के दौरान यहाँ रिकॉर्ड 51 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने पैर रखा था. इतनी बड़ी भीड़ को संभालना पुलिस और प्रशासन के लिए हमेशा एक बड़ी चुनौती रहा है. इसी समस्या को दूर करने के लिए इस बार दिल्ली, चेन्नई और मुंबई की तीन बड़ी एआई कंपनियों ने एक खास प्रपोजल तैयार किया है. शनिवार को हुई एक हाई-लेवल मीटिंग में इस बात पर मुहर लगाई गई कि आगामी नवंबर महीने से मंदिर में चरणबद्ध तरीके से यानी फेज मैनर में एआई तकनीक का इस्तेमाल शुरू कर दिया जाएगा.
महाकुंभ की तर्ज पर टेलर मेड समाधान
पठानमथिट्टा के जिला पुलिस अधीक्षक आर आनंद के मुताबिक, एआई-आधारित भीड़ प्रबंधन का सफल प्रयोग पहले महाकुंभ मेला और अन्य बड़े उत्सवों में किया जा चुका है. हालांकि, सबरीमाला की भौगोलिक स्थिति बिल्कुल अलग है क्योंकि यह घने जंगल के भीतर है. इसलिए यहाँ के लिए एक विशेष रूप से टेलर-मेड (कस्टमाइज्ड) एआई सॉल्यूशन तैयार किया जा रहा है. यह सिस्टम अलग-अलग सरकारी विभागों के बीच तालमेल बिठाने और तीर्थयात्रियों की सुरक्षा को पुख्ता करने में गेम-चेंजर साबित होगा.
खोए हुए लोग मिलेंगे और ट्रैफिक जाम से मिलेगी मुक्ति
इस नई तकनीक से भक्तों को कई बड़े फायदे होने वाले हैं. अक्सर सबरीमाला की भारी भीड़ में लोग अपने परिजनों से बिछड़ जाते हैं, लेकिन एआई कैमरों की मदद से खोए हुए लोगों को बहुत ही आसानी से ट्रैक किया जा सकेगा. इसके अलावा, मंदिर के आसपास बने 26 पार्किंग ग्राउंड्स में वाहनों की आवाजाही को बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के ऑटोमैटिक तरीके से मैनेज किया जाएगा. इससे वहां तैनात पुलिसकर्मियों का काम भी काफी आसान हो जाएगा और वे सुरक्षा पर ज्यादा ध्यान दे सकेंगे.
ड्रोन और प्रेडिक्टिव सिस्टम कैसे करेंगे काम?
इस पूरे हाई-टेक सिस्टम के तहत एआई कैमरे, ड्रोन और जीआईएस मैपिंग का एक नेटवर्क तैयार किया जाएगा. यह सिस्टम वीडियो फीड का विश्लेषण करके पहले से ही यह अनुमान लगा लेगा कि किस रास्ते पर भीड़ बढ़ने वाली है. जैसे ही किसी पॉइंट पर भीड़ ज्यादा होगी, कंट्रोल रूम को तुरंत अलर्ट मिल जाएगा. ऑन-ड्यूटी पुलिसकर्मियों के डिजिटल डिवाइस पर तुरंत मैसेज जाएगा ताकि वे समय रहते भीड़ को डायवर्ट कर सकें और किसी भी अप्रिय घटना या भगदड़ को रोका जा सके.
वर्चुअल क्यू सिस्टम का क्या होगा?
श्रद्धालुओं के मन में यह सवाल जरूर होगा कि क्या पुराना नियम बदल जाएगा? अधिकारियों ने साफ किया है कि वर्तमान में चल रही वर्चुअल क्यू व्यवस्था पहले की तरह ही लागू रहेगी. भक्तों को मंदिर जाने से पहले ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करना होगा और अपना टाइम स्लॉट चुनना होगा. हालांकि, अभी तक भक्तों को रास्ते में कई घंटों तक इंतजार करना पड़ता था, लेकिन एआई के आने के बाद रियल-टाइम डेटा मिलेगा जिससे वेटिंग टाइम काफी कम होने की उम्मीद है. इस बार सबरीमाला की यात्रा सचमुच डिजिटल और सुरक्षित होने जा रही है.
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