Birth Chart : जन्म कुंडली को व्यक्ति के जीवन का ज्योतिषीय नक्शा के रूप में माना जाता है। इसके आधार पर व्यक्ति के स्वभाव, करियर, बिजनेस, शिक्षा, विवाह, प्रेम संबंध, स्वास्थ्य से लेकर आर्थिक स्थिति सहित कई पहलुओं के बारे में जाना जा सकता है। ये सब ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित है। इसका कोई वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित नहीं हैं।
कुंडली क्या है?
वैदिक ज्योतिष के अनुसार, किसी भी व्यक्ति की जन्म कुंडली उसके जन्म के समय आकाश में ग्रहों, राशियों और नक्षत्रों की स्थिति क्या है। इसी के आधार पर बनाई जाती है। कुंडली के द्वारा व्यक्ति के स्वभाव, शिक्षा, करियर, विवाह, स्वास्थ्य, धन और जीवन की विभिन्न संभावनाओं के बारे में संकेत प्रदान करती है। कुंडली में 12 भाव, 12 राशियां और 9 प्रमुख ग्रहों की स्थिति का अध्ययन करके ज्योतिषीय विश्लेषण किया जाता है।
कुंडली बनाने के लिए क्या आवश्यक है?
वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुंडली बनाने के लिए तीन चीजें सबसे ज्यादा जरूरी है। इसी के आधार पर बनती है। इनमें थोड़ा सा भी बदलाव आपकी भविष्यफल को बदल सकता है ये तीन चीजें हैं –
जन्म तिथि, जन्म समय, जन्म स्थान
कुंडली बनाने की प्रक्रिया
लग्न की गणना
सबसे पहले लग्न की गणना की जाती है। इसके लिए व्यक्ति के जन्म के समय कौन सी राशि पूर्व दिशा में उद्त हो रही है। यहीं राशि लग्न कहलाती है। लग्न को ही कुंडली का पहला भाव माना जाता है।
ग्रहों की स्थिति निर्धारित करना
सूर्य, चंद्रमा, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु की जन्म समय की स्थिति ज्ञात की जाती है। हर किसी के जीवन में इनकी मात्रा अलग-अलग है।
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