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व्यक्ति के जीवन और भाग्य के बारे में लग्न और नवांश कुंडली को जानिए

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Kundli : ज्योतिष विज्ञान में जन्म कुंडली और नवांश कुंडली दोनों का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। अगर किसी व्यक्ति के जीवन स्वभाव, विवाह, धर्म, आध्यात्मिक उन्नति से लेकर भाग्य के बारे में जानना होता है, तो दोनों कुंडली का संयुक्त रूप से आलंकन करना बेहद जरूरी माना जाता है। केवल जन्म कुंडली देखकर अंतिम निर्णय नहीं लिया जा सकता है। जन्म कुंडली को ही लग्न कुंडली कहा जाता है और दूसरी ओर नवांश कुंडली का निर्माण ग्रहों की शक्ति को बताता है यानी ग्रह कितने शुभ और खराब हो सकते हैं। जानते हैं लग्न कुंडली और नवांश कुंडली का क्या है अर्थ और अंतर –

लग्न कुंडली क्या होती है?

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, व्यक्ति के जन्म के समय पूर्वी क्षितिज जो राशि उदित हो रही होती है, तो उसे लग्न कहा जाता है। इसी को कुंडली का पहला भाव मानकर लग्न कुंडली यानी जन्म कुंडली बनाई जाती है। ऋषि पराशर द्वारा रचित बृहत् पाराशर होरा शास्त्र में लग्न के महत्व के बारे में श्लोक के माध्यम से बताया गया है।

श्लोक

लग्नं तनुः स्मृतं विप्र देहस्वास्थ्यसमन्वितम्।
वर्णाकृतिवयश्चौव सुखदुःखादिकं तथा॥

अर्थ

इस श्लोक में महर्षि पराशर जी कहते हैं कि लग्न से जातक के शरीर, स्वास्थ्य, रूप, रंग, आयु, व्यक्तित्व तथा जीवन के सुख-दुःख का विचार किया जा सकता है।

लग्न कुंडली के द्वारा इन चीजों को देखा जाता है – 
व्यक्ति के व्यक्तित्व और स्वभाव के बारे में लग्न कुंडली के माध्यम से जाना जा सकता है।
स्वास्थ्य और आयु
शिक्षा और करियर
धन और संपत्ति
परिवार और संतान
सामाजिक पद- प्रतिष्ठा
जीवन की प्रमुख घटनाओं के बारे में

नवांश कुंडली क्या होती है?

वैदिक ज्योतिष शास्त्र में नवांश को सबसे महत्वपूर्ण विभाजन कुंडलियों में से एक है। प्रत्येक राशि को 9 समान भागों में विभाजित किया जाता है। इन नौ भागों से जो कुंडली बनती है, उसे नवांश कुंडली कहा जाता है। इस कुंडली के माध्यम से जातक को भाग्य, धर्म, विवाह और जीवन के परिपक्व परिणामों के साथ ग्रहों की सूक्ष्म शक्ति के बारे में पता चल सकता है।

फलदीपिका में नवांश का महत्व

दक्षिण भारत के महान ज्योतिषी ऋषि मंत्रेश्वर ने हिंदू वैदिक ज्योतिष का एक अत्यंत प्रसिद्ध और प्रामाणिक ग्रंथ फलदीपिका लिखा है जिसमें नवांश के महत्व के बारे में बताया गया है।

श्लोक
नवांशे बलहीनस्तु ग्रहः स्वफलदो न हि।
नवांशबलसम्पन्नः पूर्णं फलमुदीरयेत्॥

अर्थ

अगर कोई ग्रह नवांश में निर्बल हो तो वह अपनी राशि में स्थित होकर भी पूर्ण फल नहीं दे पाता। वहीं नवांश में बलवान ग्रह अपने फल को पूर्ण रूप से प्रदान करता है।

नवांश कुंडली में क्या-क्या देखा जाता है –
विवाह और दांपत्य जीवन
जीवनसाथी का स्वभाव
भाग्य और धर्म
आध्यात्मिक उन्नति
ग्रहों की वास्तविक शक्ति
विवाह के बाद जीवन में आने वाले परिवर्तन

शास्त्रों में नवांश का महत्व

वैदिक ज्योतिष के एक प्रमुख ग्रंथ ‘षट्पंचाशिका’ (ैींजचंदबींेीपां) में नवांश के महत्व को बताते हुए कहा गया है कि ग्रहों का नवांश वर्ग (9वां विभाजन) उनकी वास्तविक आंतरिक क्षमता और बल को परखने का सबसे उत्तम पैमाना माना जाता है।

श्लोक

“नवांशैरेव ज्ञेयं ग्रहाणां बलमुत्तमम्” यानी ग्रहों का वास्तविक और श्रेष्ठ बल नवांश के माध्यम से जाना जाता है।

ज्योतिष में लग्न और नवांश कुंडली का संयुक्त महत्व

वैदिक ज्योतिष के आचार्यों को लेकर इसका मत है कि केवल जन्मकुंडली देखकर निर्णय नहीं भविष्य या वर्तमान को लेकर बिल्कुल भी निर्णय नहीं करना चाहिए। अगर कोई ग्रह जन्म कुंडली में मजबूत दिख रहा हो लेकिन नवांश में कमजोर हो, तो उसका फल अपेक्षा से कम हो सकता है। वहीं जन्म कुंडली में सामान्य दिखाई देने वाला ग्रह यदि नवांश में शक्तिशाली हो, तो समय आने पर उत्कृष्ट परिणाम दे सकता है।

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