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राम मंदिर के चढ़ावे पर सवाल के बीच क्या है अन्य मंदिरों में व्यवस्थाएं ? जानिए

Temples of nation

Temple: अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावे की चोरी को लेकर उठे विवाद के बीच इस चर्चा ने जोर पकडा है कि देश के अनेक बडे मंदिरों में चढावे की गिनती कैसे होती है और किस तरह से ऑडिट होती है। देश के दूसरे बडे मंदिर तिरुपति बालाजी, शिरडी साईंबाबा और सांवलिया सेठ में हर दिन करोड़ों का दान आने पर भी ऑडिट सिस्टम पूरी तरह से पारदर्शी है। इसकी वजह वहां का सिस्टम और सख्त निगरानी व्यवस्था है। कहीं जिला जज की निगरानी में दानपेटी खुलती है, कहीं बुलेटप्रूफ हॉल में नोट गिने जाते हैं। कहीं गिनती करने वालों को बिना जेब वाले कपड़े पहनने पड़ते हैं, तो कहीं पब्लिक खुद गिनती कर सकती है। जानते हैं अन्य बडे मंदिरों की व्यवस्थाओं के बारे में –

राजस्थान के चित्तौड़गढ़ स्थित सांवलिया सेठ

मंदिर में भी चढ़ावे की निगरानी बेहद सख्त और पारदर्शी मानी जाती है। हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को दानपेटियां खोली जाती हैं। खुले हॉल में चढ़ावे की गिनती होती है, जो कई दिन तक चलती है। हर शाम प्रेस रिलीज जारी करके उस दिन की गिने गए रुपए और सोने-चांदी का हिसाब दिया जाता है। खास बात यह है कि कोई भी आम श्रद्धालु गिनती करने का काम कर सकता है। इसके लिए मंदिर प्रशासन श्रद्धालु का आधार कार्ड मांगता है। दैनिक भास्कर के रिपोर्टर सचिन मुद्गल खुद इस गिनती में हिस्सा ले चुके हैं। पूरी प्रक्रिया के दौरान ।क्ड स्तर के अधिकारी, मंदिर मंडल के पदाधिकारी और बैंक ऑफ बड़ौदा के कर्मचारी मौजूद रहते हैं। करीब 200 लोगों की टीम नोट गिनती है। पूरी प्रक्रिया ब्ब्ज्ट और लाइव वीडियोग्राफी की निगरानी में होती है। दान में मिले सोने-चांदी का वजन इलेक्ट्रॉनिक कांटों से किया जाता है। उसे मिलीग्राम तक रिकॉर्ड में दर्ज कर सीलबंद स्ट्रॉन्ग रूम में रखा जाता है। साल 2025-26 में यहां 337 करोड़ रुपए से ज्यादा का चढ़ावा आया है।

केरल का श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर

दुनिया के सबसे समृद्ध मंदिरों में गिना जाता है। इसके तहखानों में 1.2 लाख करोड़ रुपए से अधिक का खजाना होने का अनुमान है। यहां दान और फाइनेंशियल मैनेजमेंट की निगरानी सुप्रीम कोर्ट के आदेश से बनी प्रशासनिक समिति करती है। तिरुवनंतपुरम के जिला जज इस निगरानी समिति के चेयरमैन होते हैं। दानपेटी से निकले पैसे और सिक्कों की गिनती ब्ब्ज्ट निगरानी में होती है। इस दौरान बैंक अधिकारी, सुरक्षाकर्मी और समिति के सदस्य मौजूद रहते हैं। ट्रांसपेरेंसी के लिए समय-समय पर ऑडिट किया जाता है।

आंध्र प्रदेश का तिरुमाला तिरुपति वेंकटेश्वर मंदिर

दान प्रबंधन के मामले में दुनिया के सबसे व्यवस्थित मॉडलों में गिना जाता है। यहां रोजाना लगभग 4 से 4.5 करोड़ रुपए का चढ़ावा आता है। दानपेटियों की गिनती के लिए अलग से हाईटेक जगह ‘परकामणि भवन’ बनाई गई है। हॉल में शीशे की दीवारें बनाई गई हैं, जिससे श्रद्धालु बाहर से पूरी प्रक्रिया देख सकें। चढ़ावे की गिनती के लिए केवल 35 से 65 साल के ऐसे हिंदू पुरुषों को जिम्मेदारी दी जाती है, जो केंद्र या राज्य सरकार, सार्वजनिक उपक्रमों या सरकारी बैंकों में कार्यरत या रिटायर्ड हों। गिनती करने वाले केवल सफेद धोती और अंगवस्त्रम (बिना शर्ट, बनियान या जेब वाले कपड़े) पहनते हैं। मोबाइल, पर्स और निजी जेवर पहनने की इजाजत नहीं होती।

महाराष्ट्र सरकार कराती है चढ़ावे का ऑडिट

महाराष्ट्र के शिरडी साईं बाबा मंदिर का मॉडल भी पारदर्शिता के लिए जाना जाता है। मंदिर परिसर में रखी दानपेटियां मुख्य कार्यकारी अधिकारी और बैंक अधिकारियों की मौजूदगी में खोली जाती हैं। गिनती बुलेटप्रूफ कांच वाले सुरक्षित हॉल में होती है। गिनती करने वाले कर्मचारियों को बिना जेब वाले कपड़े पहनने पड़ते हैं। मेटल डिटेक्टर से जांच के बाद ही हॉल में एंट्री मिलती है। खास बात यह है कि यहां का ऑडिट निजी चार्टर्ड अकाउंटेंट नहीं ,बल्कि महाराष्ट्र सरकार का लोकल फंड ऑडिट विभाग करता है।

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