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ममता काला कोट पहनकर पहुंचीं हाईकोर्ट, बाहर लगे नारे

Mamta Benarjee

Mamta Benarjee: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों के नतीजों के बाद हुई चुनावी हिंसा से जुड़ी जनहित याचिका के मामले में अपनी तरफ से दलीलें पेश करने के लिए पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष ममता बनर्जी गुरुवार को काला कोट पहनकर कलकत्ता हाईकोर्ट पहुंची। ममता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस सुजॉय पाल और जस्टिस पार्थसारथी सेन के सामने पेश हुईं। सुनवाई के दौरान ममता ने कोर्ट को बताया कि राज्य में हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों के बाद बड़े पैमाने पर हिंसा हुई। इसमें बुलडोजर एक्शन भी शामिल है। पुलिस प्राथमिक रिपोर्ट दर्ज करने की परमिशन नहीं दे रही है। उन्होंने टीएमसी कार्यकर्ताओं पर हमले, आगजनी और हत्याओं के आरोप लगाते हुए कोर्ट से सुरक्षा और निष्पक्ष जांच की मांग की। सुनवाई के बाद जब ममता कोर्ट रूम से बाहर निकलीं, तो गलियारों में मौजूद वकीलों की भीड़ ने उन्हें घेर लिया। ये सभी ममता को देखकर बुआ चोर-भतीजे चोर के नारे लगाने लगे।

बार काउंसिल ने मांगे ममता के वकालत के रिकॉर्ड 

बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने पश्चिम बंगाल बार काउंसिल को पत्र लिखकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के एनरोलमेंट और वकालत के रिकॉर्ड मांगे हैं। BCI ने एनरोलमेंट, प्रैक्टिस के निलंबन और प्रैक्टिस सर्टिफिकेट की जानकारी 2 दिन के भीतर देने को कहा है।

सुप्रीम कोर्ट में भी दलीलें रख चुकी हैं ममता

सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी में पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) मामले पर सुनवाई की थी, जहां तब बंगाल की मुख्यमंत्री रहीं बनर्जी ने भीं दलीलें रखीं थीं। कोर्ट रूम में 13 मिनट तक अपनी बात रखी। बेंच के सामने हाथ जोड़कर खड़ी EX CM ने कहा कि हमें कहीं न्याय नहीं मिल रहा।

ममता के पास LLB की डिग्री

ममता के इलेक्शन एफिडेविट के अनुसार, उन्होंने 1979 में कोलकाता यूनिवर्सिटी से MA करने के बाद, जोगेश चंद्र चौधरी कॉलेज (कोलकाता) में LLB कोर्स में एडमिशन लिया था। 1982 में उनका LLB पूरा हो गया था।  1980 के दशक में कलकत्ता हाईकोर्ट में एक वकील के रूप में प्रैक्टिस की थी। उनका यह करियर लंबे समय तक नहीं चला, क्योंकि इसी दौरान वे पूरी तरह सक्रिय राजनीति में उतर गईं।  लंबे समय तक प्रैक्टिस करने वाली वकील नहीं रहीं। वे लॉ ग्रेजुएट हैं और कोर्ट की कार्यप्रणाली और संवैधानिक प्रक्रियाओं की समझ रखती हैं।

TMC का दावा- चुनाव बाद हिंसा की 2000 घटनाएं

पश्चिम बंगाल का 2021 का विधानसभा चुनाव सबसे हिंसक चुनाव था, जिसमें हिंसा की 300 घटनाएं हुईं और 58 लोगों की मौत हुई थी। भाजपा का दावा है कि 2026 चुनाव के बाद उसके 4 से ज्यादा कार्यकर्ताओं की हत्या की गई है। हालांकि TMC के मुताबिक हिंसा की 2,000 से अधिक शिकायतें सामने आई हैं, लेकिन किसी में FIR दर्ज नहीं की गई है। उसके 5 से ज्यादा कार्यकर्ताओं की भी हत्या की गई है।

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