Payal Nag story- 18 साल की पैरा आर्चर पायल नाग ने अपने पहले ही इंटरनेशनल टूर्नामेंट में गोल्ड जीतकर नया इतिहास बना दिया है. बिना हाथ और पैरों के तीरंदाजी करने वाली पायल दुनिया की पहली क्वाड्रपल एम्प्युटी आर्चर हैं. जो लड़की कभी मुंह से पेंटिंग बनाकर चर्चा में आई थी आज वही आर्चरी में कमाल कर रही है.
वर्ल्ड चैंपियन को हराकर जीता गोल्ड
बैंकॉक में आयोजित वर्ल्ड आर्चरी पैरा सीरीज में पायल ने अपनी ही आइडल शीतल देवी को 139-136 से हराकर गोल्ड मेडल जीता. यह उनकी पहली इंटरनेशनल प्रतियोगिता थी और उसमें ही जीत हासिल करना उनकी प्रतिभा को दिखाता है.
एक हादसे ने बदल दी जिंदगी
साल 2015 में एक बड़ा हादसा हुआ जब पायल रायपुर में एक निर्माणाधीन बिल्डिंग पर खेलते वक्त 11 हजार वोल्ट के तार की चपेट में आ गईं थीं इस हादसे में वे बुरी तरह झुलस गईं और डॉक्टरों को उनकी जान बचाने के लिए उनके दोनों हाथ और पैर काटने पड़े. हादसे के बाद परिवार गांव लौट आया जहां लोगों ने निराशाजनक बातें कहीं. लेकिन पायल की मां ने हार नहीं मानी. उन्होंने पायल के मुंह में पेन पकड़ाकर कहा कि अब यही उनका हाथ है. यहीं से पायल ने खुद को नए तरीके से संभालना शुरू किया.
पेंटिंग से शुरू हुआ नया सफर
पायल ने मुंह से लिखना और पेंटिंग बनाना शुरू किया. धीरे-धीरे उन्होंने इस कला में महारत हासिल कर ली 2022 में उन्होंने ब्लॉक और जिला स्तर की प्रतियोगिताओं में जीत हासिल की जबकि स्टेट लेवल पर भी गोल्ड मेडल जीता. साल 2023 में उनकी पेंटिंग बनाते हुए एक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हुई इसने उनकी जिंदगी को नया मोड़ दे दिया था. पैरा आर्चरी कोच कुलदीप वेदवान ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और उन्हें ट्रेनिंग के लिए जम्मू बुलाया.
आर्चरी में रखा पहला कदम
शुरुआत में पायल को आर्चरी के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी लेकिन शीतल देवी के वीडियो देखकर उन्होंने इस खेल को समझा और उन्हें अपना आदर्श बना लिया. कोच के भरोसे और अपनी मेहनत से उन्होंने जल्दी ही इस खेल में पकड़ बना ली थीं. साल 2025 में पायल ने अपने पहले नेशनल टूर्नामेंट में गोल्ड हासिल किया. उन्होंने बड़े खिलाड़ियों को हराकर अपनी पहचान बनाई. और इसके बाद इंटरनेशनल स्तर पर भी उन्होंने वही प्रदर्शन दोहराया और गोल्ड जीतकर सबको हैरान कर दिया था.
खास डिवाइस से आसान हुई ट्रेनिंग
आर्चरी के नियमों को ध्यान में रखते हुए उनके कोच ने एक खास डिवाइस तैयार किया था. इसकी मदद से पायल अब अपने पैर और कंधे के सहारे धनुष चलाती हैं और सटीक निशाना लगाती हैं. उनकी मेहनत और जज्बे को देखकर शीतल देवी ने उन्हें “इंडियाज मिरेकल आर्चर” का नाम दिया. यह उनके संघर्ष और सफलता की सबसे बड़ी पहचान बन चुका है. अब पायल का लक्ष्य हैं 2028 पैरालंपिक में भारत के लिए गोल्ड मेडल जीतना है. वे लगातार मेहनत कर रही हैं और आने वाले टूर्नामेंट्स के लिए पूरी तरह तैयार हैं.



