Kalash Pooja : आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व शुरू हो रहा है. साल 2026 में शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्टूबर, रविवार से हो रही है. नवरात्रि नौ दिनों का एक ऐसा पावन पर्व है जिसमें देवी की नव शक्तियों की आराधना की जाती है. इन दिनों में देवी मां को नौ दिनों के लिए पूजा स्थल पर विराजमान किया जाता है. सभी भक्त उपवास, मंत्र उच्चारण, भजन कीर्तन और पूजा-अर्चना से मां का ध्यान लगाते हैं, ताकि उनके घर में सुख, समृद्धि और सकारात्मकता का वास बना रहे. इस पूजन में कलश स्थापित करने का बहुत बड़ा महत्व होता है. हिंदू धर्म में कलश को सुख और समृद्धि का मुख्य प्रतीक माना जाता है।
कलश के अंदर क्या डालना चाहिए?
आचार्य अनुसार नवरात्रि में कलश स्थापित करते समय उसके अंदर कुछ विशेष और पवित्र चीजें डाली जाती हैं. सबसे पहले कलश में सादा शुद्ध जल भरें और उसमें थोड़ा सा गंगाजल मिलाएं. इसके बाद कलश के जल में साबुत अक्षत यानी बिना टूटे हुए चावल डालें. फिर उसमें देवी को प्रिय कोई भी सुंदर पुष्प अर्पित करें. इसके साथ ही कलश में एक सिक्का भी डाला जाता है, जो समृद्धि का सूचक है. अंत में कलश के जल में हल्दी की गांठ डालें या फिर एक चुटकी हल्दी मिला दें. ये सभी चीजें जल में मिलाने से कलश की पवित्रता कई गुना बढ़ जाती है. पूजा के समय कलश में ये चीजें सही तरह से डालने पर घर में खुशहाली आती है और देवी मां का आशीर्वाद पूरे परिवार पर सदैव बना रहता है।
कलश के ऊपर नारियल रखने का विशेष महत्व
हिंदू धर्म में सभी शुभ अवसरों पर कलश के ऊपर नारियल रखने का बहुत अधिक महत्व माना गया है. नारियल को श्रीफल भी कहा जाता है, जिसका अर्थ है लक्ष्मी जी का फल. इसे कलश पर रखने से घर में सुख और शांति बनी रहती है. नारियल जिस प्रकार बाहर से कठोर और अंदर से बहुत कोमल होता है, ठीक उसी प्रकार हमें भी अपने अहंकार का त्याग करके बहुत विनम्र भाव से प्रभु को स्वयं को समर्पित करना चाहिए. नारियल के अंदर का सफेद भाग हमारी सच्चाई को दर्शाता है कि हमें प्रभु के समक्ष अपने सभी छल-कपट का पूरी तरह त्याग कर देना चाहिए. इसके अलावा नारियल की तीन आंखें तीनों देवों ब्रह्मा, विष्णु और महेश को संबोधित करती हैं. अतः नारियल रखने से जीवन में शांति आती है।
घटस्थापना में श्रीफल और पवित्र जल के लाभ
नवरात्रि में घटस्थापना के समय पवित्र जल और श्रीफल का उपयोग करने से जीवन में अत्यंत शुभ परिणाम प्राप्त होते हैं. कलश में भरा हुआ गंगाजल और शुद्ध जल घर की नकारात्मक ऊर्जा को समाप्त करके सकारात्मकता का संचार करता है. जल के भीतर अक्षत, पुष्प, सिक्का और हल्दी की गांठ मिलाने से घर में सुख, समृद्धि और धन-धान्य की वृद्धि होती है. वहीं कलश के ऊपर रखा नारियल यानी श्रीफल सीधे तौर पर देवी लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है. इसे स्थापित करने से घर में शांति बनी रहती है और परिवार के सदस्यों के बीच प्रेम बढ़ता है. नारियल की तीन आंखें त्रिदेवों का आशीर्वाद दिलाती हैं, जिससे जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं।
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