South Asia Politics : बांग्लादेश ने चटगांव में चीन को ड्रोन फैक्ट्री बनाने के लिए दे दी है। पहले यह जमीन भारत को दी गई थी अब यूनुस सरकार ने सेज (स्पेशल इकोनॉमिक जोन) का भूमि आवंटन रद्द कर दिया गया है।
लगभग 850 एकड़ में फैली इस जमीन में इस साल के अंत तक प्रोडक्शन शुरू हो जाएगा। चीन ड्रोन टेक्नोलॉजी को ट्रांसफर करने को भी राजी हो गया है। यहां मीडियम रेंज और वर्टिकल लिफ्ट वाले ड्रोन बनेंगे।
चटगांव प्लांट भारतीय सीमा से 100 किमी दूर है। बांग्लादेश दक्षिण एशिया में भारत-पाकिस्तान के बाद ड्रोन बनाने वाला तीसरा देश बन जाएगा।
दूसरी ओर चीन ने बीते साल बांग्लादेश को 20 J-10CE फाइटर जेट देने की डील भी की थी। ये सप्लाई भी इस साल के अंत से शुरू हो जाएगी। चीन ने बांग्लादेश को पेमेंट में भी बड़ी मोहलत दी है।
10 साल पहले भारत को जमीन मिली थी
भारत और बांग्लादेश के बीच 2015 में एक समझौता हुआ था। पीएम मोदी की ढाका यात्रा के दौरान शेख हसीना के साथ संयुक्त घोषणा में भारत के निवेशकों के लिए एक इंडियन इकोनॉमिक जोन (प्मर््) स्थापित करने का फैसला लिया गया।
यह गवर्नमेंट-टू-गवर्नमेंट फ्रेमवर्क पर था, जिसमें भारतीय निवेशकों को प्राथमिकता मिलती और भारत की लाइन ऑफ क्रेडिट से फंडिंग होती।
इसके लिए चटगांव के मीरसाराई में लगभग 850 एकड़ भूमि आवंटित की गई थी। एक और दूसरा छोटा इकोनॉमिक जोन मोंगला (बागेरहाट) में भी प्रस्तावित था।
इसका मकसद द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाना, भारतीय निवेश आकर्षित करना, रोजगार सृजन करना और बांग्लादेश में भारतीय कंपनियों के लिए विशेष सुविधाएं प्रदान करना था। 2019 में ठमर््। और अदानी पोर्ट्स एंड ैमर्् के बीच डवन् साइन हुआ था और भारत ने 115 मिलियन डॉलर से समर्थन दिया था।
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बांग्लादेश-चीन के बीच 20 हजार करोड़ की जेट डील
बांग्लादेश सरकार ने अक्टूबर 2025 में चीन के जे-10सीई मल्टीरोल फाइटर जेट की खरीद को मंजूरी दी थी। 20 विमानों की डिलीवरी 2027 तक की जाएगी, जिसकी कुल लागत 2.2 अरब डॉलर (करीब 20 हजार करोड़) होगी, जिसमें प्रशिक्षण और स्पेयर पार्ट्स शामिल हैं। भुगतान 10 वर्षों में किया जाएगा।
जे-10सीई विमान 4.5 पीढ़ी की तकनीक, एईएसए रडार, पीएल-15ई मिसाइल और उन्नत डेटा लिंक से लैस होंगे। इसके साथ बांग्लादेश चीन और पाकिस्तान के बाद तीसरा देश बन जाएगा, जिसके पास यह मॉडर्न पीढ़ी के फाइटर जेट होंगे।
बांग्लादेश का ये अब तक का किसी भी देश के साथ जेट खरीद का सबसे बड़ा सौदा है। चटगांव में बन रहे ड्रोन प्लांट में भी शुरुआती रकम चीन ने अपने खजाने से लगाई है।
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चीन सरकार का सैन्य उपक्रम सीईटीसी इस प्लांट का निर्माण कर रहा है। सीईटीसी ने कई अफ्रीकी देशों जैसे सोमालिया, लीबिया और मोरक्को में भी डिफेंस प्रोडक्शन यूनिट लगाई हैं।



