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PM मोदी ने पचपदरा रिफाइनरी का किया उद्घाटन, बोले- मिडिल ईस्ट में युद्ध की वजह से हर देश त्रस्त…

Pachpadra Refinery Inauguration

Pachpadra Refinery Inauguration: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज(4 जुलाई) राजस्थान के दौरे पर हैं. उन्होंने बालोतरा के पचपदरा में देश की सबसे आधुनिक रिफाइनरी का उद्घाटन किया. साथ ही ग्रीनफील्ड रिफाइनरी-सह-पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स से रिफाइनरी प्रोडक्शन टैंकरों को हरी झंडी दिखाई. यह कॉम्प्लेक्स हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) और राजस्थान सरकार के संयुक्त उपक्रम के तौर पर विकसित किया गया है. वहीं पीएम मोदी ने कार्यक्रम के दौरान राजस्थान सरकार के अलग-अलग विभागों में भर्ती हुए लगभग 54,000 युवाओं को नियुक्ति पत्र सौंपे.कार्यक्रम में अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री ने कहा कि ये धरती, अनगिनत वीरों के शौर्य की साक्षी रही है. इस रण के कण-कण ने हमें स्वाभिमान को सर्वोपरि रखने की सीख दी है और स्वाभिमान व्यक्ति का या फिर स्वाभिमान देश का, तभी ऊंचा रह सकता है जब वो आत्मनिर्भर हो. दूसरों पर कम से कम निर्भर हो.

“टर्मिनल का आर्किटेक्चर और इंटीरियर छाया हुआ है”
PM मोदी ने कहा कि आज राजस्थान की इस धरती से भारत ने विकसित होने, आत्मनिर्भर होने की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम उठाया है. आज इस रिफाइनरी को देश को समर्पित किया गया है. ये रिफाइनरी यहां हजारों लोगों के रोजगार का माध्यम बनेगी. मैं राजस्थान के युवाओं को इस रिफाइनरी की विशेष तौर पर बधाई देता हूं. उन्होंने कहा कि आज राजस्थान में विकास के कई और भी कीर्तिमान स्थापित हो रहे हैं. आज ही जोधपुर में नए एयरपोर्ट टर्मिनल का उद्घाटन किया गया है. मैं सोशल मीडिया पर देख रहा था कि ये नए टर्मिनल का आर्किटेक्चर और इंटीरियर छाया हुआ है, चारों तरफ राजस्थान ही राजस्थान ही दिख रहा है. ये मारवाड़ में पर्यटन, व्यापार और रोजगार को नई गति देगा.

“युद्ध की वजह से पूरी दुनिया में हाहाकार मचा है”
उन्होंने कहा कि आप भी देख रहे हैं, पश्चिमी एशिया में युद्ध की वजह से पूरी दुनिया में हाहाकार मचा है. हर देश त्रस्त है। इस युद्ध ने 21वीं सदी के सबसे बड़े ऊर्जा संकट को जन्म दिया है. बड़े-बड़े देश आज ईंधन की किल्लत से जूझ रहे हैं लेकिन 21वीं सदी के सबसे बड़े ऊर्जा संकट पर 21वीं सदी के नए भारत की इच्छा शक्ति और भारत के प्रयास, भारी पड़े हैं. भारत ने हर स्तर पर सही फैसले लिए, संकट का समय रहते सटीक आकलन किया, प्रभावी रणनीति बनाई, भारत के संसाधनों का संतुलित प्रयोग किया, भारत की कूटनीतिक शक्ति का सकारात्मक इस्तेमाल किया और तब जाकर भारत संकट से उबर पाया है. उन्होंने आगे कहा कि जब सार्वजनिक तौर पर कुछ ताकतें अफवाह और आशंका फैलाने में व्यस्त थीं, तब किस स्तर पर दिन-रात काम हो रहा था, किस तरह स्थिति को संभाला जा रहा था, वो मेहनत, वो प्रयास, वो धैर्य, नीतिगत स्तर पर, कूटनीतिक स्तर पर उठाए गए, एक-एक संवेदनशील कदम, कभी न कभी इतिहास लिखेगा. ये सब अभूतपूर्व है.

“सिलेंडर 950 रुपये से भी कम में दिया जा रहा है”
प्रधानमंत्री ने कहा कि हम सब जानते हैं, हमारी आवश्यकताओं की करीब 60% LPG अन्य देशों से आयात की जाती हैं. इसमें से भी 90% LPG खाड़ी देशों से आ रही थीं, होर्मुज (जलडमरूमध्य) से होकर आ रही थीं. अचानक से युद्ध के हालातों ने उस आपूर्ति को लगभग बंद कर दिया. आप अंदाजा लगा सकते हैं कि हमारे देश में कितना बड़ा हाहाकार मचने जा रहा था.हमने संकट शुरू होते ही रिफाइनरी के सामर्थ्य पर ध्यान केंद्रित किया.सात दिनों के भीतर LPG के उत्पादन पर बढ़ोतरी हुई.जिन रिफाइनरी ने पहले कभी LPG नहीं बनाया था उन्हें भी इसके लिए आकार दिया गया.बहुत ही कम समय में भारत ने करीब 11 लाख से ज्यादा घरों को गैस के PNG कनेक्शन से जोड़ दिया. हमने एक और आपूर्ति को सुनिश्चित किया. दूसरी ओर घरेलू उपभोक्ताओं पर बहुत बोझ भी नहीं पड़ने दिया. जो हालात थे, उनमें घरेलू गैस सिलेंडरों की कीमत 2 हजार तक जा सकती थी लेकिन हमारे यहां अभी भी घरेलू LPG सिलेंडर 950 रुपये से भी कम में दिया जा रहा है. अब से दो दिन पहले सरकार ने कमर्शियल गैस की कीमतों में भी बहुत बड़ी कटौती कर दी है. ये दिखाता है कि हमारी सरकार कितनी संवेदनशीलता से काम कर रही है.

“अफवाहें बहुत फैलाई गईं”
PM मोदी ने कहा कि हमारे देश में तेल के बड़े-बड़े कुएं नहीं हैं. जब ये संकट बढ़ा तो कच्चे तेल की कीमतें 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं. आयात के मार्ग भी बंद थे. दुनिया के कई देशों में डीजल-पेट्रोल की कीमतों में 40-50% की बढ़ोतरी हो गई.लेकिन भारत में एक दिन भी ऐसे हालात नहीं आए. अफवाहें बहुत फैलाई गईं, लोगों को डराया गया, भड़काया गया, राजनीति के खेल खेले गए लेकिन जिनके इरादे गलत थे वो सफल नहीं हो पाए. उन्होंने कहा कि भारत ने अपनी रिफाइनरी क्षमता को लगातार बढ़ाया है. अमेरिका में पिछले 50 वर्षों में एक भी नई रिफाइनरी नहीं बनी है, यूरोप की रिफाइनरी क्षमता लगातार कम होती गई है. वहीं भारत आज विश्व की चौथी सबसे बड़ी रिफाइनरी क्षमता वाला देश बन चुका है और हम यहां रुकने वाले नहीं हैं, आने वाले वर्षों में ये क्षमता और भी बढ़ने वाली है. इन्हीं प्रयासों के कारण भारत सदी के सबसे बड़े ऊर्जा संकट से लड़कर उबरा है.

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