Nobel Award : डेनमार्क के फ्रांसिस हाल्जेन को भौतिकी का नोबल पुरस्कार दिया गया है। हालांकि वैज्ञानिक हाल्जेन अभी अमेरिका में रह रहे हैं। रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज ने उन्हें आइसक्यूब न्यूट्रिनो ऑब्जर्वेटरी में अहम योगदान और अंतरिक्ष से धरती तक पहुंचने वाले बेहद ज्यादा ऊर्जा वाले न्यूट्रिनो कणों की खोज के लिए यह सम्मान दिया। हाल्जेन का जन्म डेनमार्क में हुआ था, लेकिन उन्होंने अपने वैज्ञानिक करियर का बड़ा हिस्सा अमेरिका में बिताया। नोबेल विजेताओं को दिसंबर में स्वीडन के स्टॉकहोम में सम्मानित किया जाएगा। उन्हें मेडल, डिप्लोमा और पुरस्कार राशि मिलेगी। 2026 में नोबेल पुरस्कार की राशि करीब 11.5 करोड़ रुपए है।
2025 में इलेक्ट्रिक सर्किट से जुड़ी क्वांटम खोज के लिए मिला नोबेल
2025 का फिजिक्स नोबेल जॉन क्लार्क, मिशेल एच. डेवोरेट और जॉन एम. मार्टिनिस को दिया गया था। उन्हें ऐसी खोज के लिए सम्मानित किया गया, जिसमें क्वांटम दुनिया के नियमों को इलेक्ट्रिक सर्किट में देखा गया। वैज्ञानिकों ने दिखाया कि क्वांटम दुनिया में होने वाली घटनाएं सिर्फ बेहद छोटी चीजों में ही नहीं, बल्कि इलेक्ट्रिक सर्किट में भी देखी जा सकती हैं। इस खोज से क्वांटम कंप्यूटिंग जैसी नई तकनीकों को समझने और आगे बढ़ाने में मदद मिली।
मेडिसिन नोबेल जर्मनी के पीटर हेगेमैन और जॉर्ज नागेल और अमेरिका के कार्ल डाइसेरोथ को
2026 का मेडिसिन नोबेल जर्मनी के पीटर हेगेमैन और जॉर्ज नागेल और अमेरिका के कार्ल डाइसेरोथ को दिया गया है। इन वैज्ञानिकों ने ऑप्टोजेनेटिक्स नाम की ऐसी तकनीक विकसित करने में मदद की, जिससे रोशनी की मदद से दिमाग की अलग-अलग तंत्रिका कोशिकाओं को नियंत्रित करके उनके काम को समझा जा सकता है। पहले वैज्ञानिकों के लिए यह पता लगाना मुश्किल था कि दिमाग की कौन-सी तंत्रिका कोशिका किस काम के लिए जिम्मेदार है। ऑप्टोजेनेटिक्स की मदद से अब वैज्ञानिक याददाश्त, भावनाओं और व्यवहार को बेहतर तरीके से समझ पा रहे हैं। इससे डिप्रेशन जैसी मानसिक बीमारियों और दिमाग से जुड़ी दूसरी बीमारियों पर रिसर्च करना भी आसान हुआ है। नोबेल कमेटी के मुताबिक, इन तीनों वैज्ञानिकों की खोज ने दिमाग को समझने के लिए रिसर्च का एक नया रास्ता खोल दिया है। इस तकनीक का इस्तेमाल आंखों की बीमारियों पर भी किया जा रहा है। वैज्ञानिक यह पता लगा रहे हैं कि इसकी मदद से दृष्टि खो चुके लोगों की आंखों की रोशनी वापस लाई जा सकती है या नहीं।
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